साथ साथ धूमते है, 
हम दोनो रात भर..! 
लोग मुझे आवारा, 
और उसे चाँद कहते है..!


उनकी जब मर्जी होती है तब हमसे बात करते हैं, और हम पागल पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतज़ार करते हैं|


याद तो रोज करते है उन्हें ,
पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. 😌



अकेली रात बोलती बहुत है,
 लेकिन सुन वही सकता है 
जो खुद भी अकेला  हो |


जिंदगी भर के लिये रूठ के जाने वाले,
मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिये बैठा हूँ.


शीशे की तरह साफ़ हूँ फिर भी न 
जाने क्यू अपनों की समझ से बाहर हूँ..



मन को निराश न कर,   बस श्रीकृष्ण पर तु विश्वास कर, हर पल साथ है वो मुरली वाला इस बात का एहसास कर |


खुदा को भी पसंद है सायद मेरी पसंद, 
तभी तो वो हर बार उसे छीन लेता है मुझसे.



चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया।