लगता है अब तो खुद से मिलना पड़ेगा, 
लोगों से सुना है बड़े दिलचस्प है हम.


हर दरबार में जा कर मांगा है तुम्हें, 
हलवा मिल जाता है, तुम नहीं..



वास्ता नहीं रखना तोह नज़र क्यों रखते हो ! किस हाल मैं ज़िंदा हूँ खबर क्यों रखते हो !




वाह गालिब तेरे इश्क के फतवे भी कमाल,  वो देखें तो अदा हम देखें तो बवाल।