Roman 11 August Roman Sad खुशी मेरी तलाश में यूहींभटकती रही, साहबकभी उसे हमारा घर न मिलाकभी उसे हम घर पर न मिले।
Roman 07 August Roman Sad वास्ता नहीं रखना तोह नज़र क्यों रखते हो ! किस हाल मैं ज़िंदा हूँ खबर क्यों रखते हो !