अपनी मर्जी से भी चले...



अपनी मर्जी से भी दो चार कदम चलने दें ऐ-जिन्दगी, तेरे कहने पे तो बरसों चलें हैं..🥺

ये रात हमसे...



ये रात हमसे बहुत प्यार करती है, सबको सुलाकर हमसे अकेले में बात करती है।

खोकर पता चलती है.


खोकर पता चलती है कीमत किसी की, पास अगर कोई हो तो एहसास कहाँ होता है। 

किसी एक का ही होकर..



किसी एक का ही होकर रहना सीख लो, वही इश्क़ है...❤️

सोचा था न करेंगे..



सोचा था न करेंगे किसी से दोस्ती! न करेंगे किसी से वादा! पर क्या करे दोस्त मिला इतना प्यारा की करना पड़ा दोस्ती का वादा।

मिलावट का जमाना...



मिलावट का जमाना है ✨  साहिब, कभी हमारी हाँ में हाँ भी मिला दिया करो...! 

कौन कहता है...




कौन कहता है कि ईश्वर नजर नहीं आता,  😊 सिर्फ वही तो नजर आता है, जब कोई नजर नहीं आता | 🙏

सरकारी दफ्तर जैसे...




सरकारी दफ्तर जैसे तेवर हैं "साहिबा के" प्यार माँगता हूँ तो कहती है कल आना।❤️