कलयुग नहीं .....




कलयुग नहीं मतलबीयुग युग चल रहा।

मुझे फुर्सत कहाँ की...


मुझे फुर्सत कहाँ की मौसम सुहाना देखूं,,
तेरी यादों से निकलूँ तभी तो जमाना देखूं।

कोई इश्क करें और...



कोई इश्क करें और उसे दर्द ना हो,
कमाल करते हो जनाब..
दिसंबर की रात हो और सर्द ना हो..