शादीशुदा लाइफ का मजा ही कुछ अलग...है  खाने को मिले या ना मिले, सुनने को भरपूर मिल जाता है...


एक थी समझने वाली मुझे ...




एक थी समझने वाली मुझे ... 
अब वो भी समझदार हो गयी है  

स्टेशन जैसी हो गयी है....


स्टेशन जैसी हो गयी है 
ज़िन्दगी,
जहां लोग तो बहुत है,
पर अपना कोई नहीं.

कलयुग नहीं .....




कलयुग नहीं मतलबीयुग युग चल रहा।

मुझे फुर्सत कहाँ की...


मुझे फुर्सत कहाँ की मौसम सुहाना देखूं,,
तेरी यादों से निकलूँ तभी तो जमाना देखूं।

कोई इश्क करें और...



कोई इश्क करें और उसे दर्द ना हो,
कमाल करते हो जनाब..
दिसंबर की रात हो और सर्द ना हो..