शादीशुदा लाइफ का मजा ही कुछ अलग...है  खाने को मिले या ना मिले, सुनने को भरपूर मिल जाता है...


एक थी समझने वाली मुझे ...




एक थी समझने वाली मुझे ... 
अब वो भी समझदार हो गयी है  

स्टेशन जैसी हो गयी है....


स्टेशन जैसी हो गयी है 
ज़िन्दगी,
जहां लोग तो बहुत है,
पर अपना कोई नहीं.