मुझे छांव में रखा और खुद जलता रहा धुप में , मैंने देखा है एक फरिश्ता मेरे पिता के रूप में


इस इश्क ने देखो कैसे तबाही मचा रखी है.. आधी दूनिया पागल आधी शायर बना रखी है...




किससे  बयान  करूँ मैं  अपने  दर्द  को सुनने  वाले  तो  बहुत  हैं  मगर  समझने  वाला  कोई  नही




गलतफहमी में जीने का मजा ही कुछ और है वरना हकीकते तो अक्सर रुला ही जाती है..



हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नहीं चाहते... 


इश्क़ कर लीजिये बेइंतेहा किताबों  से, एक यही हैं जो अपनी बातों से पलटा नहीं करतीं। 



इतना भी हमसे नाराज़ मत हुआ करो, बदकिस्मत ज़रूर हैं हम मगर बेवफा नहीं..





इतनी नजरअंदाजी भी ठीक नहीं,.....
जाने कौन सी बात, मेरी आखिरी बात हो जाए..